खाटू में फाल्गुन आए गयो रे,
खाटू में फाल्गुन आए गयो रे,
श्याम खेले होली नाचे झूमे टोली,
श्याम खेले होली नाचे झूमे टोली ।।
तर्ज – करके इशारो बुलाए गई रे ।
जो ना जाने गांव यो थारे,
जो ना जाने गांव यो थारे,
खाटु में बैठो बताए दियो रे,
श्याम खेले होली नाचे झूमे टोली,
श्याम खेले होली नाचे झूमे टोली ।।
जो कोई आवे रंग लगावे,
जो कोई आवे रंग लगावे,
भरके पिचकारी वो मार गयो रे,
श्याम खेले होली नाचे झूमे टोली,
श्याम खेले होली नाचे झूमे टोली ।।
जो कोई आवे शीश नमावें,
जो कोई आवे शीश नमावें,
हारे को साथी बताए गयो रे,
श्याम खेले होली नाचे झूमे टोली,
श्याम खेले होली नाचे झूमे टोली ।।
सब मिलकर के श्याम पुकारे,
सब मिलकर के श्याम पुकारे,
आरती ललित को बुलाए लियो रे,
श्याम खेले होली नाचे झूमे टोली,
श्याम खेले होली नाचे झूमे टोली ।।
लेखक – ललित मली जी, आरती मली जी




